Saturday, May 11, 2013

मरी माँ (On Mother's Day)


Some thoughts on Maa on Mother's Day !

"मुझे हंसती है, गुस्सा भी दिलाती है...
कभी खुद रो देती है, कभी मुझे रुलाती है...
वो मेरे सपने को, अपने पलकों पर संजोती है...
कभी भटक जाऊ, तो लक्ष की याद दिलाती है...

खाऊ नहीं मैं कभी, तो वो भूकी सो जाती है...
मरी आखों मैं, मरी शिकन देख पति हैं...
मुझे जल्दी जगना हो, तो वो खुद पहले जग जाती है...
सवेरे सवेरे वो हर रोज, गरमा गरम चाय पिलाती है...

निःस्वार्थ से ये सब, बस एक माँ ही कर पति है."


@ Lokiish Todi 2013

Friday, May 10, 2013

भीड़




मै आज फिर से, कहीं भीड़ में खो गया हूँ,
खुद को खोजते हुए,बर्फ़ से नीर हो गया हूँ





@ Lokiish Todi 2013

Monday, May 6, 2013

Interviewing Mr. P.K. Nair (the Celluloid Man) on 100 years of Cinema


Naseeruddin Shah confesses that it was Nair who introduced him to World Cinema.

@ Lokiish Todi 2013

Saturday, May 4, 2013

हंसी



"कभी खुद को देखता हूँ आईने मॅ... तो हंसते हुए रो देत हूँ.
ज़ीवन के कटु अनुभवों को मैं... इन हंसी मॅ डुबो देत हूँ."



@ Lokiish Todi 2013