Some thoughts on Maa on Mother's Day !
"मुझे हंसती है, गुस्सा भी दिलाती है...
कभी खुद रो देती है, कभी मुझे रुलाती है...
वो मेरे सपने को, अपने पलकों पर संजोती है...
कभी भटक जाऊ, तो लक्ष की याद दिलाती है...
खाऊ नहीं मैं कभी, तो वो भूकी सो जाती है...
मरी आखों मैं, मरी शिकन देख पति हैं...
मुझे जल्दी जगना हो, तो वो खुद पहले जग जाती है...
सवेरे सवेरे वो हर रोज, गरमा गरम चाय पिलाती है...
निःस्वार्थ से ये सब, बस एक माँ ही कर पति है."
@ Lokiish Todi 2013




